Facebook

हरियाणा में दलित फिर बने निशाना, कई घर जलाए

हरियाणा में दलित फिर बने निशाना, कई घर जलाए
http://khabar.ibnlive.in.com/news/34185/3

फरीदाबाद। हरियाणा के मिर्चपुर का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि सोमवार को हरियाणा के पलवल में दलितों के घर में घुसकर तोड़फोड़, मारपिटाई और घरों में आग लगा दी गई।


पंचायत चुनाव के लिए हो रही वोटिंग के दौरान गांव के दबंग चाहते थे कि वो दलित उम्मीदवार को वोट न देकर उन्हें दें। जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो दबंगों ने पूरे गांव में जमकर उत्पात मचाया और पुलिस हाथ बांधकर तमाशा देखती रही। घटना के बाद से पूरे गांव में तनाव का माहौल है और पुलिस मामले को दबाने में जुटी है।

दरअसल पलपल के भिदुकी गांव में दबंगों को ये किसी भी कीमत पर गवारा नहीं कि उनके गांव प्रधान कोई दलित बने। पंचायत चुनाव के दौरान पहले तो दबंगों ने दलितों को वोट डालने से रोका जब दलित नहीं माने तो घरों मे घुसकर मारपिटाई और तोड़फोड़ कर डाली। पीड़ितों के मुताबिक ग्राम पंचायत के चुनावों में दलित उम्मीदवार भी खड़े थे और गांव के सभी दलित उस दलित उम्मीदवार को वोट डाल रहे थे जिससे गांव के दबंग भड़क गए।





 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
चुनाव होने की वजह से गांव में पुलिस मौजूद थी लेकिन हमेशा की तरह पुलिस तमाशबीन बनी रही। गांव में दलित प्रधान ना बनने देने की कसम खा चुके दबंगों ने उम्र तक का लिहाज नहीं किया। अपने मां-बाप के उम्र के बुजुर्गों तक की जमकर पिटाई की।
 
पीडितों के मुताबिक उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया है। भारी तनाव होने के बावजूद गांव में महज तीन जवानों को तैनात किया गया है। गांव में दबंगो की दबंगई का आलम ये है कि उन्होंने बूथ पर तैनात पुलिस वालों को भी नहीं छोड़ा उनके साथ मारपीट और ईवीएम मशीनें तोड़ डालीं।


हरियाणा के मिर्चपुर गांव में दलितों पर हुए हमले के बाद राज्य में ये दूसरी घटना है। अभी तक मिर्चपुर गांव के दलितों को न्याय नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आज तक लोग गांव में घुसने की हिम्मत नहीं जुटा रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या राज्य की सरकार को दलितों की कोई परवाह नहीं।

मामले को रफा-दफा करने की कोशिश में जुटी पुलिस
इतना कुछ करने के बाद भी गांव के दबंग खुलेआम पुलिस प्रशासन को देख लेने की धमकी दे रहे हैं। पुलिस वालों को दंबगों की गुंडागर्दी दिखाई नहीं दे रही है। पुलिस चुनावी हिंसा बताकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश में जुटी है। प्रशासन को लगता है कि ये घटना महज एक चुनावी झगड़ा था। इससे दलितों का कोई लेना-देना नहीं।
गांव के दबंग घंटों तक दलितों पर ईंट-पत्थर बरसाते रहे लेकिन पुलिस कान में तेल डालकर सोती रही। ऐसा नहीं था कि पुलिस को इस घटना की जानकारी नहीं थी। बकायदा गांव वालों ने डीसी और एडीएम को बूथ पर झगड़ा होने की आशंका जताते हुए लिखित शिकायत की थी।

मालूम हो कि गांव के दबंग विधानसभा चुनाव में भी दलितों के साथ मारपिटाई कर चुके थे लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए। इतना ही नहीं घटना के समय पीड़ितों ने डीसी ऑफिस में फोन करके अपनी सुरक्षा के लिए गुहार लगाई लेकिन पुलिस ने गांव में आना मुनासिब नहीं समझा।

जिन दबंगों को पुलिस और प्रशासन का डर नहीं, कानून का डर नहीं। वो दलितों के साथ कैसे पेश आएंगे। इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं। पर पुलिस और सरकार को कुछ नहीं दिखाई देता। क्या पुलिस को दबंगों की गुंडागर्दी का कुछ और सबूत चाहिए। आखिर हरियाणा की पुलिस कब जागेगी। कब सरकार को दिखाई देगा दलितों का दर्द।

0 comments:

Post a Comment

 
Copyright 2011 Mulnivasi Sangh